तुलसी घाट का नाम महान कवि तुलसीदास (1547-1622) के नाम पर रखा गया, जिन्होंने संस्कृत महाकाव्य रामायण का अनुवाद रामचरितमानस लिखा था। तुलसीदास ने घाट के ठीक ऊपर एक मठ, हनुमान मंदिर और अस्कहा की स्थापना की। मूल रूप से घाट को लोलार्क घाट के नाम से जाना जाता था, जिसका नाम लोलार्क कुंड के नाम पर रखा गया था जो आज भी थोड़ी दूरी पर मौजूद है, कालांतर में इस घाट को 'लोलार्क घाट' कहा जाता है.
क्यों खास है तुलसी घाट:-
तुलसी घाट का नाम संत तुलसीदास जी के नाम पर रखा गया है. इसके पीछे भी एक खास वजह है. इस घाट से संत तुलसीदास जी का गहरा नाता है, जिसे आप आज भी देख सकते हैं. इस घाट पर ही संत तुलसीदास जी ने हनुमान मंदिर बनवाया था. कृष्ण लीला नाट्य मंचन की शुरुआत संत तुलसी दास जी द्वारा की गई थी. आइए जानते हैं कि क्यों श्रद्धालुओं को जीवन में एक बार तुलसी घाट जरूर जाना चाहिए..
घाट का महत्त्व और अनुष्ठान :-
इस घाट पर सूर्य भगवान का एक मंदिर भी है. कहते हैं कि लोलार्क कुंड में स्नान करने से संतान प्राप्ति की मनोकामना शीघ्र पूरी होती है.
एक टिप्पणी भेजें