हनुमान घाट औपचारिक रूप से रामेश्वरम घाट के रूप में भी जाना जाता है, हनुमान घाट का नाम यहां मंदिर के नाम पर रखा गया है जिसे 18 वीं शताब्दी में महान कवि तुलसीदास जी द्वारा बनाया गया था। यह घाट भैरव के कुत्ते रूप "रुरु" के मंदिर के लिए भी जाना जाता है
हनुमान घाट वाराणसी में एक प्रसिद्ध धार्मिक संप्रदाय जूना अखाड़े के पास स्थित है। इसे पहले रामेश्वरम घाट के नाम से जाना जाता था क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इसे स्वयं भगवान राम ने अपने वफादार भक्त भगवान हनुमान के सम्मान में बनवाया था।
भगवान हनुमान शारीरिक शक्ति के देवता हैं; इसलिए घाट बॉडी बिल्डरों और पहलवानों का पसंदीदा स्थान है। संयोग से, अखाड़ा शब्द का अर्थ एक दरबार या एक विशेष मैदान भी होता है, जहाँ पहलवान और तगड़े लोग अपने अभ्यास करते हैं और प्रतियोगिताएँ आयोजित करते हैं।
हनुमान घाट वैष्णव संप्रदाय के प्रसिद्ध संत वल्लभाचार्य, भगवान कृष्ण के एक महान भक्त का निवास स्थान भी था।
घाट का महत्त्व और अनुष्ठान:-
घाट में संत-कवि तुलसीदास द्वारा स्थापित एक मंदिर है, जिन्होंने रामायण का विश्व प्रसिद्ध महाकाव्य लिखा था। घाट वाराणसी में श्री शंकराचार्य मठ के श्री कांची कामकोटि पीठम का भी दावा करता है। श्री कामकोटेश्वर मंदिर एक भव्य मंदिर है जहां नियमित रूप से भक्ति सेवाएं आयोजित की जाती हैं
जूना अखाड़ा और हनुमान जी :-
हनुमान घाट, जूना अखाड़ा के पास स्थित है, जो वाराणसी का एक प्रसिद्ध धार्मिक संप्रदाय है। इस घाट को पहले रामेश्वरम घाट के नाम से जाना जाता था, क्योंकि लोगों का मानना है कि इस घाट को भगवान राम ने स्वंय अपने वफादार भक्त हनुमान के लिए बनाया था। हनुमान जी हिंदूओं के देवता है जिन्हे शारीरिक शक्ति का देवता माना जाता है, यह जगह शरीर बनाने वाले पहलवानों और कुश्तीबाजों के लिए पसंदीदा स्थल है। संयोग से, यह घाट भी अखाड़ा क्षेत्र में आता है, अखाड़ा का अर्थ होता है कि वह जगह जहां कुश्तीबाज आपस में कुश्ती लड़ते है, दांव पेंच करते है और अपनी शारीरिक शक्ति का दमदार प्रर्दशन करते है। हनुमान घाट, वैष्णव संप्रदाय के संत वल्लभाचार्य का निवास स्थान भी था, यह संत भगवान कृष्ण के उपासक थे। इस घाट पर महाकाव्य रामायएा के रचयिता संत कवि तुलसीदास द्वारा स्थापित एक मंदिर भी है। इस घाट में वाराणसी के श्री कांची कामकोटि पीठम् श्री शंकराचार्य मतम का दावा भी किया जाता है। यहां एक भव्य मंदिर भी है, जिसे श्री कामकोटेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में भक्त सदैव आकर अपनी धार्मिक श्रद्धा को दिखाते है।
-जूना अखाडा में स्थापित श्री हनुमान जी 🌺
एक टिप्पणी भेजें